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हिंदू कॉलेज में 'दीपक सिन्हा स्मृति व्याख्यान'

 


Varta Sambhav-Dhanbad   ·

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में आज दीपक सिन्हा स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया, जहाँ वक्ताओं ने आचार्य रामचंद्र शुक्ल के साहित्यिक योगदान और प्रो. दीपक सिन्हा के शिक्षक व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
आचार्य शुक्ल और लोकमंगल की भावना पर चर्चा
नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री और युवा लेखक व्योमेश शुक्ल मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने आचार्य रामचंद्र शुक्ल के साहित्यिक अवदान को 'महनीय' बताया:
* सरस्वती और द्विवेदी जी का योगदान: व्योमेश शुक्ल ने कहा कि सरस्वती पत्रिका और महावीर प्रसाद द्विवेदी का योगदान बहुत बड़ा है, जिसे रामचंद्र शुक्ल के लेखन और द्विवेदी जी द्वारा उसके संपादित स्वरूप की तुलना करने पर समझा जा सकता है।
* लोकमंगल की भावना: उन्होंने कहा कि आचार्य शुक्ल के निबंध संग्रह 'चिंतामणि' के पंद्रह निबंधों में से दस का शीर्षक 'मनुष्य' है, जो कहीं न कहीं उनकी लोकमंगल की भावना को उजागर करता है।
* कविता की अवधारणा: शुक्ल ने आचार्य शुक्ल की साहित्यिक अवधारणाओं की चर्चा करते हुए कहा कि आचार्य ने कविता को मनुष्यता की संरक्षिका बताते हुए उसे मनुष्य के भावों की रक्षा करने वाली शक्ति माना है।
* 'कविता क्या है' पर प्रकाश: उन्होंने आचार्य शुक्ल और द्विवेदी जी के पत्राचार की पंक्तियों को भी उद्धृत किया और 'कविता क्या है' निबंध की लंबी यात्रा को विस्तार से बताया।
प्रो. दीपक सिन्हा को श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और हिंदी विभाग के पूर्व शिक्षक डॉ. दीपक सिन्हा को श्रद्धांजलि अर्पित करने से हुई।
* प्रो. रामेश्वर राय का संस्मरण: हिंदी विभाग के पूर्व शिक्षक प्रो. रामेश्वर राय ने दीपक सिन्हा के बारे में संस्मरणात्मक टिप्पणी की। उन्होंने शिक्षक होने के अर्थ को बताते हुए कहा, "शिक्षक होने एवरेस्ट की चोटी पर खड़ा होना है, जहाँ से आप छलाँग तो लगा सकते हो, पर ऊपर नहीं जा सकते।" उन्होंने डॉ. सिन्हा को ऐसे ही उदार मनुष्य और बड़े शिक्षक के रूप में याद किया।
हिंदी साहित्य सभा की नई कार्यकारिणी का परिचय
हिंदी विभाग के प्रभारी प्रो. बिमलेंदु तीर्थंकर ने हिंदी साहित्य सभा की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि 125 सालों से अधिक समय से कार्यरत इस हिंदी विभाग की सभा में भारतीय साहित्य के महान हस्ताक्षर समय-समय पर आते रहे हैं।
आभार प्रदर्शन के साथ आयोजन का समापन हुआ।
(कैलाश सिंह, संयोजक, हिन्दी साहित्य सभा, हिंदू कॉलेज, दिल्ली)

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